व्यथित उर का हर एक कण हो तो "बेकल" जन्म लेता है।
जो पिघले भाव-घन, निष्छल नयनजल जन्म लेता है।
अहम् से, स्वार्थ से उत्पन्न होता है "चयन" लेकिन,
समर्पित जब समर्पण हो तो "केवल" जन्म लेता है।
- रोहित श्रीवास्तव "अथर्व"
जो पिघले भाव-घन, निष्छल नयनजल जन्म लेता है।
अहम् से, स्वार्थ से उत्पन्न होता है "चयन" लेकिन,
समर्पित जब समर्पण हो तो "केवल" जन्म लेता है।
- रोहित श्रीवास्तव "अथर्व"
